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रोज सोचता हूं US में कोई इंजीनियर कुछ नया बना रहा होगा, हम रुके तो पिछड़े: पिचाई

रोज सोचता हूं US में कोई इंजीनियर कुछ नया बना रहा होगा, हम रुके तो पिछड़े: पिचाई

lt;bgt;कैलिफोर्निया.lt;/bgt; गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई का कहना है कि जो जितने बड़े स्तर पर है, वो उतने ही दबाव में है। ये बात दुनिया के हर इंसान या संस्थान पर लागू होती है। 23 लाख सर्च प्रति सेकंड के रेट से गूगल दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन है। लिहाजा सीईओ पर जिम्मेदारी भी बड़ी रहती है। हमें हर दिन कुछ नया रचना है। सुंदर ने एक अखबार को दिए इंटरव्यू में ये बातें कहीं। उन्होंने कामयाबी, जिम्मेदारी, चुनौती और भारत पर भी बातें कीं। lt;bgt;बातचीत के खास अंश... lt;/bgt; lt;bgt;# सफलता और साथ आने वाली जिम्मेदारी पर पिचाई बोले lt;/bgt; - कामयाबी के साथ जिम्मेदारियां भी आती हैं। हर दिन मैं ये सोचता हूं कि सिलिकॉन वैली के किसी गैराज में कोई इंजीनियर कुछ नया रच रहा होगा। शायद बेहतर भी। हम रुक गए तो पिछड़ जाएंगे। हमें रोज कुछ नया करना होगा। इसके लिए जरूरी है कि ऐसा सिस्टम तैयार हो, जिसमें आपके पास अच्छी टीम हो और सब मिलकर काम करें। किसी एक इंसान को सुपरस्टार बना देने वाला कल्चर लंबे समय तक टिक नहीं पाता। lt;bgt;# फ्यूचर टेक्नोलॉजी और चुनौती पर... lt;/bgt; - आगे आने वाले वक्त हिसाब से खुद को तैयार करते रहना बहुत बड़ी चुनौती है। हमें अब मोबाइल टेक्नोलॉजी से आगे सोचना होगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में सोचना होगा। यही फ्यूचर टेक्नोलॉजी है। जब हम भविष्य के बारे में सोचते हैं तो ये भी ध्यान रखना होता है कि आखिर इंसान किस रफ्तार से खुद को बदलना चाह रहा है। हमें उसी रफ्तार से नई चीजें उन्हें देनी हैं। lt;bgt;# वर्क अप्रोच पर... lt;/bgt; - कल से बेहतर काम आज करना है। चीजों से असहमत होने भर से काम नहीं चलेगा। हमें ये देखना होगा कि कौन सी वो जरूरी बातें हैं, जिनसे हम सहमत हो सकते हैं। इस लिहाज से हमें खुद के लिए पैरामीटर तय करना ही सबसे बड़ा काम है। lt;bgt;# टेक्नोलॉजी और जेनरेशन गैप पर... lt;/bgt; - सिलिकॉन वैली में कई लोग ऐसे हैं, जिन्होंने वीडियो गेम्स खेलते हुए ही हाईस्कूल पास किया और ऐसे ही बड़े हुए। ये पीढ़ी एक नई दुनिया से जुड़ी है। टेक्नोलॉजी की दुनिया। पुरानी पीढ़ी को भी ये बात समझनी होगी। विजुअल इन्फॉर्मेशन का जमाना है। इससे जुड़कर ही हमें आगे बढ़ना पड़ेगा। lt;bgt;# भारत से जुड़ाव पर... lt;/bgt; - चेन्नई और आईआईटी खड़गपुर की याद अब तक दिल में है। मुझे अब भी याद है कि बचपन में जिस दिन मेरे घर में फ्रिज आया, उसी दिन से मां की मेहनत आधी हो गई। मैं ऐसी जगह से आया हूं, जहां से मैंने बदलाव को करीब से देखा है। टेक्नोलॉजी के बिना जिंदगी और इसके आने पर हुए बदलाव को मैंने महसूस किया है। कम उम्र में ही समझ गया था कि जिंदगी बेहतर बनाने में टेक्नोलॉजी बड़ी भूमिका निभाती है। उम्मीद है कि एक दिन भारत जरूर लौटूंगा और तब देश को कुछ वापस दे सकूंगा।