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अमेरिका से यूनेस्को से हुआ अलग, इजरायल के चलते लिए फैसला

अमेरिका से यूनेस्को से हुआ अलग, इजरायल के चलते लिए फैसला

lt;bgt;वाशिंगटन.lt;/bgt; संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक और शैक्षणिक एजेंसी-यूनेस्को से अमेरिका 31 दिसम्बर से बाहर हो रहा है। यह घोषणा अमेरिकी विदेश विभाग ने गुरूवार को की। विभाग ने कहा है कि यह फैसला यूनेस्को में बढ़ते बकाए, संगठन में बुनियादी सुधार की जरूरत और यूनेस्को की इजरायल विरोधी पूर्वाग्रहों के प्रति अमेरिकी चिंताओं को व्यक्त करता है। विभाग की ओर से कहा गया है अमेरिका अपने विचार, दृष्टिकोण और विशेषज्ञता संबंधी योगदान देने के लिए गैर-सदस्य पर्यवेक्षक के रूप में इस संगठन से जुड़े रहने का इच्छुक है। lt;bgt;फंड की दिक्कत हो सकती है यूनेस्को को...lt;/bgt; - अमेरिका के इस फैसले से फंड की कमी से जूझ रहे यूनेस्को की दिक्कत और बढ़ सकती है। - संगठन को दिए जाने वाले फंड की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आलोचना भी कर चुके हैं। - यूनेस्को को अमेरिका से हर साल आठ करोड़ डॉलर (करीब 520 करोड़ रुपये) की मदद मिलती है। lt;bgt;फलस्तीन के चलते नाराज था अमेरिकाlt;/bgt; - यूनेस्को का मुख्यालय पेरिस में है। संयुक्त राष्ट्र का यह संगठन 1946 से काम कर रहा है। इसे विश्व धरोहरों को चिह्नित करने के तौर पर जाना जाता है। - अमेरिका ने साल 2011 में फलस्तीन को यूनेस्को का पूर्णकालिक सदस्य बनाने के फैसले के विरोध में इसके बजट में अपने योगदान नहीं दिया था। - इससे पहले फॉरेन पॉलिसी मैगजीन ने भी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि 58 सदस्यीय यूनेस्को के कार्यकारी बोर्ड द्वारा शुक्रवार को नए महानिदेशक का चुनाव किए जाने के बाद अमेरिका इससे अलग होने का एलान कर सकता है।