नजरिया

'वाचाल रोबोट' बनाम 'मौनी रोबोट'

'वाचाल रोबोट' बनाम 'मौनी रोबोट'

नरेश गुप्ता

कश्मीर और पाकिस्तान नीति की वजह से मोदी की लोकप्रियता पर ब्रेक लग गया है। अब लगने लगा है कि 'वाचाल रोबॉट' भी 'मौनी रोबोट' से ज्यादा अलग तो नहीं। ऐसा प्रतीत होता है जैसे इन हालातों के चलते 2019 में 'सेकुलर्स गैंग' के लिए 'वाचाल समूह' रास्ता तैयार कर रहा है।

एक चैनल पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह बड़ी शान बघारते हुए बोल गए कि देश की जनता ने हमसे कुछ ज्यादा उम्मीद नहीं रखी थी, उन्हें सिर्फ एक बोलने वाला प्रधान मंत्री चाहिए था। लीजिए साहब, भाजपा ने आपको एक अति वाचाल प्रधानमंत्री दे दिया। जो लगातार बोलता है बिना रुके बोलता है, मतलब और बेमतलब का फर्क किए बिना बोलता है। नारियल और अन्नानास को एक समझ बोलता है, मन की बोलता है चाय की बोलता है, नोटबंदी से उपजे भयंकर हालात को नजरअंदाज कर बोलता है, सर्जिकल स्ट्राइक का भोंपू बजा बजा कर बोलता है, 70 साल का गाना गा- गा कर बोलता है, और चुनावी मौसम में तो क्या-क्या बोलता है खुद उन्हें नहीं पता होता।

यही 'वाचाल रोबोट' गोरक्षा के नाम पर हो रही गुंडा गर्दी पर कुछ नहीं बोलता, नक्सली हमले में जवानों की मौत पर कुछ नहीं बोलता, चौतरफा 3 गुना बढे भ्रष्टाचार पर कुछ नहीं बोलता, आये दिन नयी मुद्रा की नक़ल के पकड़े जाने पर कुछ नहीं बोलता, कालाधन के सवाल पर कुछ नहीं बोलता, किसान आत्म हत्या पर कुछ नहीं बोलता, देश भक्ति के नाम पर भगवा गैंग की गुंडा गर्दी पर कुछ नहीं बोलता, आये दिन भाजपा सांसदों के भड़काऊ बयानों पर कुछ नहीं बोलता, सीमा पर जवानों के शवों के साथ हुई अमानवीयता पर कुछ नहीं बोलता, मंदी की चपेट में आए कामगारों के हालात पर कुछ नहीं बोलता, किसानों की कर्ज माफ़ी पर कुछ नहीं बोलता, गंगा माँ ने बुलाया है बोल कर उसी गंगा की सफाई पर कुछ नहीं बोलता।

धन कुबेरों का धन जाएगा और गरीबों के पास आएगा बोल कर देश को दो महीने लाइन में खड़ा करके क्या पाया पता नहीं पर धन कुबेरों को 'कर्ज माफ़ी क्यों?' के सवाल पर कुछ नहीं बोलता, बैंको द्वारा की जा रही मन मानी लूट पर कुछ नहीं बोलता, FDI के नाम पर विदेशी कम्पनियों द्वारा की जा रही भारत के छोटे व्यापारियों के साथ धोखाधड़ी पर कुछ नहीं बोलता।

अमित शाह की बात में दम है और उनकी साफगोई पर भी उन्हें सम्मान दिया जाना चाहिए। यही वो शख्स है जिसने बोला था कि काले धन के नाम पर हर भारतीय के खाते में 15 लाख आ आएंगे, ये सिर्फ एक चुनावी जुमला था। इन्हीं अमित शाह ने आज ये स्वीकार किया कि भाजपा ने सिर्फ एक वाचाल प्रधानमंत्री देश को दिया क्योंकि देश की उम्मीद भी यही थी। देश का वोटर क्या मायने रखता है और उसकी कीमत क्या है ये दर्पण दिखा दिया आज अमित शाह ने।

हर बात को इतिहासिक बताने वाले खुद इतिहास में ही कितने कमजोर हैं, इसकी बानगी इनके कोई भी चुनावी भाषण सुन कर अंदाजा लगा सकते हैं और जिसे इतिहास की जानकारी ही ना हो वो क्या इतिहास लिखेंगे और क्या इतिहास से सबक सीखेंगे. ढपोरशंख का क्या हश्र हुआ ये इतिहास पढ़ कर ही पता चलेगा।


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