नजरिया

सत्ता के अकड़बाज नेताओं की हेकड़ी निकल जाएगी जिस दिन जनता सवाल पूछना शुरू करेगी

सत्ता के अकड़बाज नेताओं की हेकड़ी निकल जाएगी जिस दिन जनता सवाल पूछना शुरू करेगी

नरेश गुप्ता।

सैंडल मार शिवसेना सांसद रवींद्र गायकवाड़ पर से हवाई यात्रा करने पर लगा बैन हट गया है। हटना तय ही था क्योंकि वही सैंडल जब अनंत गीते जी ले दौड़े नागरिक उड्डयन मंत्री की तरफ तभी ये तय हो गया था की भैया एक आम नागरिक के चक्कर में आपस में जूतम पैजार कोई अच्छी बात थोड़े न है।

खैर इसमें जिसका जो भी नुकसान हुआ वो अपनी जगह है लेकिन PM मोदी और भाजपा सरकार से इतेफाक ना रखने वालों का मोदी सरकार और भाजपा से हटा हटाया विश्वास कुछ और हट गया और उनकी कुंठा जायज भी है, वैसे भी मैं तो हमेशा से कहता आया हूँ कि सावधानी हटी दुर्घटना घटी।

कुछ मित्र जो कल तक कह रहे थे कि एफआईआर हो गई है, गिरफ्तारी भी होगी, कानून अपना काम करेगा, उनको भी सांत्वना देनी बनती है कि मन छोटा नहीं करना। ऐसा तो होता ही रहता है। अब किसी को ये थोड़े ही पता था कि धक्का गायकवाड़ ने नहीं पहले गायकवाड़ को एयर इण्डिया के कर्मचारी ने मारा था। यहाँ गायकवाड साहब और सत्ता के गलियारों में अकड़ी-अकड़ी गर्दनों से घूमने वालों को बताता चलूँ कि जिस दिन देश में आम कर्मचारी या आम जनता विधायको और सांसदों को धक्का मारना तो छोडो सिर्फ सवाल पूछना शुरू कर देगी उस दिन आपकी गर्दन का सारा कलफ निकल जाएगा। खैर अब यहाँ जमीन पर बैठे-बैठे ये सारी ऊंची ऊँची आसमानी सुल्तानी बातें थोड़े ही कोई पता लगा सकते है कि किसने किसको धक्का मारा अब सियासतदानों को बचाने जो कुछ कहा जाए उसे मान लेने के अलावा आपके और मेरे पास रास्ता भी क्या है?

तो चलो बीती बिसार दें और आगे की सुध लें। अब सोचना ये है कि किस तरह से कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही है कि अपराध कोई भी करे वो अपराधी तब कहलाएगा जब वो विशेष पार्टी से न हो, दबंग न हो, हाँ कमजोर हो, आप पार्टी का हो, तब कानून को देखिएगा कैसे काम करता है, तत्काल गिरफ्तारी, जेल और धारा भी ऐसी की मत पूछो एक दो अतिरिक्त धारा, जेल, गिरफ्तारी के बाद तत्काल मौजूदा सरकार और दबंगों की जय जय करना बहुत बढ़िया चल रहा है यही तो है अच्छे दिन। अगर ये ही गायकवाड़ आप-पार्टी के या बसपा पार्टी के सांसद होते तो अब तक तिहाड़ में होते।
 
क्या मोदी वाकई इतने कमजोर प्रधान मंत्री हैं कि वो अपने सहायक दलों के निरंकुश नेताओं पर लगाम नहीं लगा सकते? या ये सब खेल किसी और तरफ इशारा कर रहे हैं? इंदिरा गाँधी के समय के आपातकाल का रोना रो रो कर बड़े हुए नेताओं को क्या ये अघोषित आपातकाल नजर नहीं आता? क्या कोई बताएगा कि उस एयर इंडिया के कर्मचारी की गलती क्या थी? जो उसे पिटना पड़ा और संसद तक की चर्चा से निकले नतीजों से बार-बार अपमानित होना पड़ा।

एक बहुत लोकप्रिय हास्य सीरियल आया था पंकज कपूर का और उस सीरियल में हमारी आज की ‘सरकारी व्यवस्थाओं’ को आइना दिखाते हुए एक अत्यंत चुटीले अंदाज में उत्कृष्ट अभिनय और सशक्त कथानक के दम पर सार्थक कटाक्ष किया जाता था। मुझे लगता है कि वर्तमान सांसदों को और जन नेतृत्व करने वालों को उस सीरियल का मर्म समझने में अक्ल कम पड़ गई। इसलिए शायद उन्हें वर्षों पूर्व का ना तो ‘मुसद्दी’ समझ आया और ना आज का ‘अघोषित आपात काल’।
 
शायद यही कारण है कि आज वैसी ही लचर हास्यास्पद दयनीय घिनौनी ‘सरकारी व्यवस्थाओं’ ने ‘एक आम कर्मचारी’ को और साथ ही साथ देश को इस तरह शर्मिंदा कर दिया। मुझे लगता है ‘ऑफिस-ऑफिस’ में ‘ऑफिस’ चलाने वाले सरकारी तंत्र के दिवालिए दिमाग का प्रदर्शन बदस्तूर बढ़ रहा है और आगे भी बढ़ना जारी रहेगा। पर सावधान आप कितने भी सितम कर लें, ना तो आप किसी ‘ऑफिस-ऑफिस’ के ‘मुसद्दी’ का गला घोंट पाएंगे और ना ही ये अघोषित आपात-काल ज्यादा वक्त तक चला पायेंगे। जल्द ही आप वोट के लिए फिर घुटनों के बल बैठे नजर आएंगे। ये ‘मुसद्दी’ नामक जनता आपको हमेशा सालती रहेगी। साथ ही आपको और आपकी जिद को परास्त करके ही मानेंगी।


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