नजरिया

विकसित देशों का नजरिया भी है दूषित, महिलाओं को स्वयं खोजना होगा अस्तित्व

विकसित देशों का नजरिया भी है दूषित, महिलाओं को स्वयं खोजना होगा अस्तित्व

कुछ समय पहले अमेरिकन कांग्रेस में बिल पारित हुआ था कि जबर्दस्ती अप्राकृतिक सम्बन्ध को बलात्कार नहीं माना जाएगा और अब सोवियत रूस की संसद ने घरेलू हिंसा को जुर्म मानने से इंकार कर दिया है। त्रासदी इस बात की है कि संसद में उपस्थित कुल 383 वोट में से 3 वोट घरेलु हिंसा को जुर्म मानने के हक़ में थे और 380 वोट खिलाफ थे। माना गया कि कुछ ख़ास स्थितियों जैसे कि साल में 3-4 बार हाथ पैर टूटेंगे तभी वो जुर्म है अन्यथा नहीं, मानसिक प्रताड़ना तो कहीं शामिल ही नहीं है।

हिन्दी में स्त्रियाँ पुरुषों के सौन्दर्य पर कविताएं क्यों नहीं लिखतीं ? आखि़र पुरुष भी तो सुन्दर होते ही हैं। पुरुष अपने सौंदर्य के बारे में कविताएं क्यों नहीं लिखता ? आखि़र उसने स्त्री-देह के बारे में लिख लिखकर अम्बार लगा दिया है। बात दरअसल यह है कि स्त्री देखती ही नहीं। देखता सिर्फ़ पुरुष है। स्त्री तो दृश्य है।

भाषा और कविता में कोई बड़ा बदलाव तब तक संभव नहीं है जबतक द्रष्टा और दृश्य की इस अवस्थिति में परिवर्तन न हो। यही सारे फसाद की जड़ भी है।

जब दो सुपर पावर देश अमेरिका और रूस महिलाओं के प्रति कितने संवेदनशील हैं, जबकि मिसाल सिर्फ सऊदी वालों की ही धृष्टता की दी जाती है, जबकि पूरी दुनिया ही इस दोगलेपन की शिकार है। 

हमें गर्व होना चाहिए कि हमारे यहाँ महिलाओं को बिना लड़े सारे अधिकार न सिर्फ मिले बल्कि संविधान में बलात्कार को ले कर जो व्याख्या है उसे पढ़ कर ही क्लियर हो जाता है कि बहुत स्ट्रेट माइंड सेट था लिखने वालों का। किन्तु यह देख कर घृणा भी होती है कि हमारे यहां बड़ी चालाकी से औरतों को अपने प्रोपेगंडा का शिकार बनाया जाता है, धर्म और जाति के नाम पर उत्पाद की तरह यूज़ किया जाता है।

स्वयं स्त्री जब अपने अस्तित्व को खोजे बिना खुद को शक्तिहीन या अबला मान ले तो फिर वो सिर्फ दया की पात्र ही रहेंगी और तमाम बहकावों में फंस कर कपड़ों में अपनी आजादी ढूंढ कर अपने आप को पूर्ण मान लेती हैं और समझ ही नहीं पाती कि जहां सरनेम बदलने से लेकर नाम तक बदलने की प्रथाएं हों तो वहाँ एक उत्पाद से ज्यादा कुछ नहीं हो सकती।

 

लेखकः नरेश गुप्ता 

 


Tags:

  • women,
  • Developed countries,
  • Developed countries attitude,
  • women empowerment,

कमेंट