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मोहब्बत की बात चलेगी तो याद आएंगे लैला मजनू, राजस्थान में प्यार बांट रही है उनकी ये मजार

मोहब्बत की बात चलेगी तो याद आएंगे लैला मजनू, राजस्थान में प्यार बांट रही है उनकी ये मजार


गंगानगर।
प्यार करने वालों के दिलों में एक नाम बरसों से आदर से लिया जाता है और वो नाम है लैला-मजनू का। प्यार करने वाले इस नाम से इस कदर एक दूसरे से जुड़े हैं कि ये दो नहीं बल्कि एक ही लगते हैं। जहां पर लैला का नाम आएगा वहां मजनू जरूर होगा और जहां मजनू का नाम लिया जाएगा लैला हमेशा साथ खड़ी नजर आएगी। 

कहते हैं कि इस दुनिया में जब प्यार करने वाले बिछड़ते हैं तो किसी और जहां में मिलते हैं। लैला-मजनू इस दुनिया में मिल न सके। शायद किसी और दुनिया में हमसे बेहतर लोगों के बीच लैला-मजनू मिल रहे हों। लैला-मजनू की प्रेम कहानी का अंत सुखद नहीं था लेकिन उनकी मजार आज भी लोगों में प्यार बांट रही है।

राजस्थान में पाकिस्तान बॉर्डर के निकट लैला मजनू की मजार है। जिंदगी के आखिरी लम्हे दोनों ने राजस्थान की जमीन पर ही गुजारे थे। गंगानगर की अनूपगढ़ तहसील के बिंजौर गांव में बनी इस मजार पर प्यार करने वाले लोग दूर-दूर से मन्नत मांगने आते हैं। 

ऐसी मान्यता है कि लैला-मजनू सिंध प्रांत के रहने वाले थे। उनकी मौत यहां पर हुई इस बारे में तो सब लगभग एक मत हैं लेकिन उनकी मौत कैसे हुई इसे लेकर लोगों के भिन्न-भिन्न मत हैं। एक मत के अनुसार लोग मानते हैं कि लैला के भाई को दोनों के इश्क का पता चल गया था। इससे बाद उसने गुस्से में मजनू की हत्या कर दी और जब इसका पता लैला को चला तो उसने भी मजनू के शव के पास पहुंचकर अपनी जान दे दी। 

एक अन्य मत के अनुसार वे घर से भागकर भटकते हुए यहां पर पहुंचे थे। भूख और प्यास से उनकी मौत हो गई थी। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि परिवार और समाज के रवैये से दुखी होकर दोनों ने मौत को गले लगा लिया था। 

मजार पर हर साल 15 जून को दो दिन का मेला लगता है। यहां पर बड़ी संख्या में हिन्दुस्तान के साथ पाकिस्तान से भी प्रेमी-प्रेमिकाएं और नवविवाहित जोड़े आते हैं और अपनी जिंदगी को प्रेम से भर देने की मन्नत मांगते हैं। हिन्दू और मुसलमानों के साथ ही सिख और ईसाई भी यहां पर मन्नत मांगने आते हैं। 

ये कहानी अरबपति शाह अमारी के बेटे कैस (मजनू) और लैला की है। इस कहानी का अंत दुखद हुआ, लेकिन प्यार को दोनों ने उस बुलंदी तक पहुंचा दिया कि जब भी मोहब्बत की बात आती है तो सबसे पहले याद आते हैं लैला-मजनू। इन महान प्रेमियों को सम्मान देते हुए भारतीय सेना ने भारत-पाकिस्तान की सीमा पर स्थित एक पोस्ट का नाम ‘मजनू पोस्ट‘ रख दिया है। कारगिल युद्ध से पहले यहां आने के लिए रास्ता खुला था, लेकिन घुसपैठ की आशंका के चलते इसे बंद कर दिया गया। 

आज दुनिया में लैला-मजनू का नाम है, सिर्फ इसलिए नहीं कि उन्होंने प्यार किया बल्कि इसलिए कि मोहब्बत को उन्होंने अपनी जान से कीमती समझा। मोहब्बत से खाली होती दुनिया में लैला-मजनू का प्यार अमर है। लैला-मजनू ने प्यार के जिस रास्ते से गुजरे हैं वो रास्ता हर किसी के बस की बात नहीं है, लेकिन मोहब्बत का रुमानी अहसास अपने दिलों में रखने वालों के लिए हमारे पास थोड़ा सा सम्मान तो जरूर हो ही सकता है। 


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