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चुनाव जीतना बच्चों का खेल नहीं है, लेकिन ये जनाब 52 सालों से जीत रहे हैं चुनाव

चुनाव जीतना बच्चों का खेल नहीं है, लेकिन ये जनाब 52 सालों से जीत रहे हैं चुनाव


नई दिल्ली।

चुनाव जीतना बच्चों का खेल नहीं है, लेकिन एक शख्स के लिए चुनाव जीतना बच्चों के खेल से कम भी नहीं है। इसका गवाह है केरल का जिला कोट्टयम। कोट्टयम में एक पाला नाम की जगह है। यहां के बारे में लोग अक्सर मजाक में कहते हैं कि आप यहां पर किसी भी जगह चले जाइए आपको कोई भी पूर्व विधायक नहीं दिखाई देगा। आप सोच रहे होंगे कि आजादी के बाद से इतने सालों में कोई भी पूर्व विधायक यहां पर नजर नहीं आए, भला ऐसा कैसे हो सकता है? हालांकि ये बिल्कुल सही है। यहां सिर्फ एक ही विधायक हैं और वो हैं करिन्कोजक्कल मणि मणि। लोग इन्हें के एम मणि के नाम से जानते हैं और अपने जीवन में ये 52 साल से ज्यादा का वक्त विधानसभा के सदस्य रहते हुए बिता चुके हैं। 

1965 से जब भी पाला में चुनाव हुए हर बार के एम मणि ही जीतते रहे। पीढ़ियां बदलती रहीं, नए लोग आते रहे, लेकिन लोगों ने जैसे किसी नए विधायक को लाने से तौबा कर लिया। 1965 में के एम मणि को जीत मिली। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्हें अब तक विधायक रहते हुए 52 साल बीत चुके हैं। 

वे 30 जनवरी 1933 को मरंगट्टुपिल्ली में एक साधारण परिवार में जन्मे। बड़े होकर वकालत शुरू की। उनकी पत्नी कांग्रेस के दिग्गज नेता पीटी चाको की बहन थी। लोग कहते हैं कि उनके करियर में ये बात उनके लिए काफी फायदेमंद रही। 1960 में वे कोट्टयम के कांग्रेस जिलाध्यक्ष बने। 

मणि आज करीब 84 साल के हैं, लेकिन इस उम्र में भी वे अपने इलाके के ज्यादातर लोगों को नाम से जानते हैं। कोई उनसे मिलने जाता है तो वे घरवालों का हाल पूछते हैं। नाम उन्हें याद होते हैं इसलिए वे हर किसी को चौंकने का मौका देते हैं। साथ ही जब लोग उन्हें किसी कार्यक्रम में बुलाते हैं तो वे जरूर पहुंचते हैं। यही कारण है कि अपने इलाके में वे काफी लोकप्रिय हैं, जाहिर सी बात है कि चुनावी मौसम में ये बात उनके पक्ष में जाती है और वे वोटों की बरसात अपने पक्ष में कराने में कामयाब होते हैं। 

1964 में पीटी चाको को केरल के गृहमंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा। कुछ वक्त बाद उनका निधन हो गया। बाद में कांग्रेस दो फाड़ हो गई और चाको समर्थकों ने ‘केरला प्रदेश कांग्रेस समुधारणा समिति’ नाम से अलग पार्टी बना ली। बाद में पार्टी का नाम बदलकर ‘केरला कांग्रेस’ कर दिया गया। बावजूद इसके मणि ने कांग्रेस में ही रहने का फैसला किया। हालांकि 1965 में उन्हें टिकट नहीं मिला तो वे केरला कांग्रेस में चले गए और पार्टी ने उन्हें पलई से टिकट दिया और वे चुनाव जीत गए। उस वक्त पलई को पाला के नाम से जाना जाता था। 

वे 1975 में केरल के वित्त मंत्री भी बने। उनका राजनीतिक जीवन लगभग बेदाग रहा है सिर्फ एक आरोप को छोड़कर। 2014 में मणि ओमान चांडी सरकार में वित्त मंत्री थे। बीजू रमेश नाम के एक होटल व्यवसायी ने मणि पर केरल में बंद पड़े 418 बाद दोबारा खुलवाने के लिए रिश्वत लेने का आरोप लगाया। बाद में मणि ने नवंबर 2015 में इस्तीफा दे दिया। इस मामले में विजिलेंस डिपार्टमेंट ने दो महीने की जांच के बाद मणि को क्लीन चिट दी। हालांकि कोर्ट ने फिर से जांच के आदेश दिए हैं। 


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