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जिंदगी जीने का मस्त है फंडा, दूसरों की नहीं बस अपनी शर्तों पर जिएं आैर खुद को वक्त दें

जिंदगी जीने का मस्त है फंडा, दूसरों की नहीं बस अपनी शर्तों पर जिएं आैर खुद को वक्त दें

ज़िन्दगी जिएं अपने तरीके से, ये है आज की युवा पीढ़ी का मंत्र और युवा ही क्यों क्या हम सभी अपने जीवन को अपनी शर्तों पर नहीं जीना चाहते? चाहते हैं, मगर हो कैसे? हम बहुत से बंधनों में बंधे हैं। समाज,परिवार, करियर इत्यादि-इत्यादि। चाहते हुए भी वो नहीं कर पाते जो मन चाहता है। तो आइए एक तरीका निकालते हैं जीवन की इस उथल पुथल से एक छोटी सी छुट्टी लेते हैं। मगर ये छुट्टी आप अपने परिवार या दोस्तों के साथ नहीं लेंगे, बल्कि लेंगे खुद अपने साथ। 

सर्दियां विदा ले रही हैं और गर्मियां दस्तक देने वाली हैं। ये बिलकुल परफेक्ट टाइम है एक ऐसे हॉलिडे के लिए जहां आप वक़्त बिताएं शान्ति से अपने साथ एक किताब लिए। जी हाँ, एक किताब लीजिए, कुछ कपडे पैक कीजिए और निकल जाइए कुछ नया खोजने,कुछ नए अनुभव समेटने।  ये होगा आपके लिए एक अनोखा ब्रेक। जाइए वहाँ जो आपके पसंद की जगह हो.....पहाड़, नदी, समुद्र, जंगल सफारी या अपने आस पास कोई रिसोर्ट। 

यदि आपको वादियाँ पसंद हैं तो शिमला,मसूरी,नैनीताल,उत्तराखंड या किसी भी हिल स्टेशन जाएँ, वहाँ एक शांत से रिसोर्ट में ठहरें, कल्पना करें कि सामने हरे भरे पेड़ों से लदे पहाड़ हैं और आप रिसोर्ट में एक झूले में बैठकर अपनी मनपसंद किताब पढ़ रहे हैं। इस अनुभूति में जो आनंद है,उससे कहीं ज्यादा आनंद होगा इस अनुभव में। 

कल्पना करें की आप हरी घास पर एक घने पेड़ के नीचे लेटे हैं,धूप पेड़ों से छन कर आपके चेहरे पर पड़ रही है और आप सुकून की नींद ले रहे हैं या सोचिये कि आप रेत पर बैठे सामने हिचकोले भर रही समुद्र की लहरें देख रहे हैं और समुद्र के उस पार सूरज अस्त हो रहा है। 

क्या नहीं हैं ये पल असीम शान्ति के। ये किसी ध्यान मुद्रा से कम नहीं है। क्या आपको अपनी व्यस्त ज़िन्दगी में ये पल मिलते हैं। यदि आप विद्यार्थी हैं तो पढ़ाई का बोझ, यदि युवा हैं तो करियर बनाने का जोश, यदि शादीशुदा है तो परिवार के दायित्व, ये सब आपको इतना उलझा लेते हैं कि शायद आप खुल कर सांस भी नहीं ले पाते। तो क्यों ना आप चुरा लें कुछ पल अपने लिए, सिर्फ खुद के साथ बिठाए हुए ये पल आपको देंगे एक नया नजरिया,ज़िन्दगी को देखने का और उसे जीने का। 

तो आज ही सोचिए आपको अपने साथ छुट्टी कहाँ मनानी है और कौन सी किताब पढनी है जो आपने बहुत वक्त से पढने की सोचीं हैं, मगर वक्त ही नहीं मिलता। समय दीजिये खुद को आैर आप अपनी ज़िन्दगी खुद ही बदल लेंगे। 


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