लाइफस्टाइल

 रिश्तों को सहेजने और निभाने की कोशिश में कहीं खुद को न भुला दें आप

रिश्तों को सहेजने और निभाने की कोशिश में कहीं खुद को न भुला दें आप

जयपुर:-

रिश्ते निभाना किसी के लिए ख़ुशी तो किसी के लिए मजबूरी है। हम सब कई रिश्तों में बंधे हैं। एक व्यक्ति एक ही समय में पिता भी है, भाई भी है, बेटा भी है, दोस्त भी है और सहकर्मी भी है। महिलाओं को लगता है कि जिम्मेदारियों का बोझ उन पर ही ज्यादा है पुरुषों पर नहीं, जबकि ऐसा नहीं है। सच तो ये है कि भारतीय समाज का ताना-बाना है ही कुछ ऐसा कि बचपन ख़त्म होते होते हम कब इन बंधनों के अधीन हो जाते हैं, पता ही नहीं लगता। 

ऐसा नहीं कि रिश्ते बोझ ही होते हैं, हम सामाजिक प्राणी हैं, अकेले खुश नहीं रह सकते इसलिए साथ ढूँढ़ते हैं, हमसफर ढूंढते हैं जो हमें सही गलत बताए, जिसका साथ हमारे खालीपन को दूर करे और जिसके साथ हम अपने सुख दुःख बांटे। मगर कभी कभी ये रिश्ते हमें इतना समेट लेते हैं कि हम अपने अस्तित्व, अपनी इच्छा, अपने सपनों से दूर चले जाते हैं। यही वजह है कि अब जीवन में तनाव बढ़ रहा है। शहर हो या गाँव, सुसाइड के इक्के दुक्के मामले सुनने में आते ही रहते हैं। डिप्रेशन शब्द बहुत आम हो गया है। 

सालों बाद, आप किसी दोस्त से मिलते हैं और आपको लगता है, अरे ये कितना बदल गया है या बदल गई है। असल में, ये बदलाव नहीं होता बल्कि रिश्ते निभाने की और सहेजने की कोशिश में, जीवन की दौड़ में आगे निकलने की कोशिश में, हम अपने आप को भूल जाते हैं और खो देते हैं। 

क्या करें ऐसे में?

इसके लिए अपने को महत्व दें और सामने वाले को आज़ादी दें। कभी कभी आपने देखा होगा कि यदि आप अपने किसी प्रियजन से कुछ दिन दूर रहते हैं तो मिलने के बाद का समय बहुत अच्छा गुजरता है। कभी आपने सोचा ऐसा क्यों होता है? क्योंकि ये कुछ दिनों की दूरी आपको उस इंसान का महत्व बताती है आपके जीवन में। हम ये नहीं कह रहे की आप अपनों से दूर रहें। साथ रहते हुए भी रिश्तों के महत्व को समझा जा सकता है, लेकिन खुद को और सामने वाले को ‘स्पेस’ दें। 

आजादी दें

यदि आप माता या पिता हैं तो अपने बड़े होते बेटे या बेटी को सोचने और निर्णय लेने की आज़ादी दें। याद करें कि आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी ये आज़ादी, यदि शादीशुदा हैं तो ये आज़ादी देने का फन्डा आपके लिए कई बंद दरवाज़े खोल सकता है। आप दोनों अपने अपने शौक को, अपने अपने सपनों को अपने अपने जीवन में जगह दें, और फिर देखें कमाल।

संयुक्त परिवार क्यों टूट रहे हैं?

संयुक्त परिवार का टूटना एक त्रासदी है, लेकिन संयुक्त परिवार टूट रहे हैं शायद इसलिए कि हम एक दुसरे के जीवन में घुस रहे हैं या घुसने की कोशिश कर रहे हैं। हमारी सलाह मानें, थोड़ी दूरी बनाएं और देखें कि कैसे आप अपने जीवन को खुशहाल बना सकते हैं बस ज़रुरत है थोड़े संयम की और समझदारी की। यदि आप खुश होंगे तभी तो आप अपने परिवार, अपने बॉस, अपने अपनों को खुश रख पाएंगे, तो आज ही से अपने मन के बंद दरवाज़ों को खोलें। 

 

जियो और जीने दो - इसे अपने जीवन का मंत्र बनाएं। 


Tags:

  • Relationship,
  • Giving Space in a Relationship,
  • How to Give Space in a Relationship,
  • Lifestyle,

कमेंट