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उन 61 दिनों की कहानी, जब बिग बी जिंदगी के लिए लड़े थे अस्पताल में

उन 61 दिनों की कहानी, जब बिग बी जिंदगी के लिए लड़े थे अस्पताल में

अमिताभ बच्चन आज 75वां बर्थडे सेलिब्रेट (11 अक्टूबर) कर रहे हैं। बिग बी की जिंदगी से जुड़े यूं तो कई किस्से हैं, लेकिन आज आपको फिल्म कुली के सेट पर हुए उस हादसे के बाद अमिताभ ने 61 दिन तक अस्पताल में जिंदगी के लिए कैसे जंग लड़ी थी, के बारे में बताने जा रहे हैं। अमिताभ के साथ ये हादसा 24 जुलाई, 1982 को बेंगलुरु में कुली की शूटिंग के वक्त हुआ था। lt;bgt;फाइट सीन के बाद मुस्करा रहे थे अमिताभ...lt;/bgt; फिल्म कुली की शूटिंग बेंगलुरु में चल रही थी। फाइट सीन के बाद लोग तालियां बजा रहे थे और बिग बी के चेहरेलपर मुस्कराहट थी। भीकू वर्मा एक्शन डायरेक्टर के मुताबिक, फिल्म के एक फाइट सीन में पुनीत इस्सर का घूंसा अमिताभ के मुंह पर लगना था, जिससे वे एक टेबल पर गिरते हैं। सीन के डुप्लीकेट बॉडी डबल के सहारे की बात भी की गई, लेकिन अमिताभ इसे खुद करने पर जोर दे रहे थे, ताकि सीन रियल लगे। सीन प्लान के मुताबिक शूट हुआ और पूरी तरह रियल लगा। सभी तालियां बजा रहे थे। अमिताभ भी मुस्कुराए, लेकिन तभी उनके पेट में हल्का दर्द शुरू हुआ। टेबल का एक कोना उनके पेट में बुरी तरह चुभ गया था। lt;bgt;सभी को लगा मामूली चोट हैlt;/bgt; - सभी को ये चोट मामूली लग रही थी, क्योंकि खून की एक बूंद भी नहीं निकली थी। अमिताभ होटल में आराम करने चले गए, लेकिन दर्द कम नहीं हुआ। - अगले दिन यानी 25 जुलाई को यह दर्द कम होने की बजाय बढ़ गया। उन्हें अस्पताल ले जाया गया। एक्स-रे हुआ, लेकिन डॉक्टर्स को कुछ समझ नहीं आया। - अमिताभ को नींद की गोली देकर सुला दिया गया। खबर मिलते ही मां तेजी, पत्नी जया और भाई अजिताभ बेंगलुरु पहुंचे। वे उन्हें वो उन्हें मुंबई ले जाना चाहते थे, लेकिन डॉक्टर्स ने इसकी इजाजत नहीं दी। - तीसरे दिन यानी 26 जुलाई को अमिताभ की स्थिति और बिगड़ गई। तभी वेलोर के जाने-माने सर्जन एचएस भट्ट वहां आए हुए थे। यूनिट के कई बार आग्रह करने के बाद डॉ. भट्ट अमिताभ का केस स्टडी करने के लिए तैयार हुए। - रिपोर्ट देखने के बाद उन्होंने कहा कि यदि दवाओं से आज अमिताभ की हालत नहीं सुधरी तो कल ऑपरेशन करना पड़ेगा। lt;bgt;पेट चीरने के बाद हैरान थे डॉक्टरlt;/bgt; - 27 जुलाई, 1982 को डॉक्टर्स ने ऑपरेशन का फैसला लिया। उन्होंने पेट चीरकर देखा तो हैरान रह गए। अमिताभ के पेट की झिल्ली (जो पेट के अंगो को जोड़े रखती है और केमिकल्स से उन्हें बचाती है) फट चुकी थी। छोटी आंत भी फट गई थी। - इस स्थिति में किसी भी इंसान का 3 से 4 घंटे जीवित रह पाना मुश्किल होता है। लेकिन अमिताभ 3 दिन तक इस कंडीशन से गुजरे। - डॉक्टर्स ने पेट की सफाई की, आंत सिली। उस वक्त अमिताभ को पहले से ही कई बीमारियां (अस्थमा, पीलिया के कारण एक किडनी भी खराब हो चुकी थी, डायबिटीज) थीं। ऐसे में वो इतने दिन इस प्रॉब्लम से कैसे लड़े ये किसी आश्चर्य से कम नहीं था। lt;bgt;शरीर में फैल गया था जहर, खून भी हो गया था पतलाlt;/bgt; - 28 जुलाई यानी ऑपरेशन के एक दिन बाद अमिताभ को निमोनिया भी हो गया। उनके शरीर में जहर फैलता जा रहा था, खून पतला हो रहा था। ब्लड डेंसिटी को सुधारने के लिए बेंगलुरु में सेल्स मौजूद नहीं थे, जिन्हें मुंबई से मंगवाया गया। - खून में सेल्स मिलाने के बाद अमिताभ की स्थिति 4 दिनों में पहली बार कुछ सुधरी थी, लेकिन अगले ही दिन फिर उनकी हालत खराब हो गई और उन्हें जैसे-तैसे उन्हें संभाला गया। मीटिंग कर डॉक्टर्स ने तय किया कि अमिताभ को मुंबई ले जाना ही सही होगा, वहां बेहतर इलाज की सुविधा थी। - फाइनली, एयरबस के जरिए अमिताभ को मुंबई ले जाना तय हुआ। स्टेचर पर लेटे अमिताभ को क्रेन की मदद से एयरबस में शिफ्ट किया गया। रात 11 बजे बेंगलुरु से निकली एयरबस 31 जुलाई की सुबह करीब 5 बजे मुंबई पहुंची। - उन्हें ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल की दूसरी मंजिल पर स्पेशल विजिलेंस वॉर्ड में रखा गया। 1 अगस्त की सुबह तक उनकी हालत में काफी सुधार था। lt;bgt;आगे की स्लाइड्स में पढ़िए इस घठना से जुड़ी कुछ और बातें...lt;/bgt;